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क्लेम गाइड

आपका क्लेम रिजेक्ट हो गया। अब क्या करें।

रिजेक्शन एक फ़ैसला है, अंत नहीं। इसे चुनौती देने का साफ़ रास्ता है, वह मुफ़्त है, और भारत में ज़्यादातर रिजेक्शन कागज़ों की गलती से होते हैं, इसलिए नहीं कि आप बीमार नहीं थे।

पहले लिखित में कारण मांगें

अपनी इंश्योरेंस कंपनी से पूछें कि पॉलिसी की कौन सी लाइन लगाकर क्लेम रिजेक्ट किया गया। ईमेल से पूछें, ताकि लिखित में रहे।

"पेय नहीं है" कोई जवाब नहीं है। सही जवाब में पॉलिसी की लाइन का नाम होता है। कई रिजेक्शन तब बदल जाते हैं जब किसी को कारण लिखकर देना पड़ता है।

सब कुछ संभाल कर रखें। रिजेक्शन लेटर, क्लेम नंबर, और हर कॉल की तारीख। आगे जाना पड़े तो यही कागज़ आपका सबूत हैं।

फिर एक-एक कदम आगे बढ़ें

इसी क्रम में करें। हर कदम पर पिछले कदम का हिसाब पूछा जाएगा।

  1. आपकी इंश्योरेंस कंपनी फ़ोन करें, वेबसाइट देखें, या ब्रांच जाएं। नंबर आपके पॉलिसी पेपर में हैं। क्लेम नंबर दें और लिखित में कारण मांगें।
  2. उनकी ग्रीवांस टीम हर कंपनी में होती है, आम कस्टमर केयर से अलग। उनके ग्रीवांस पेज से शिकायत करें ताकि शिकायत नंबर मिले। वह नंबर रखें।
  3. IRDAI फिर भी हल न हो? बीमा भरोसा वेबसाइट पर मुफ़्त शिकायत करें: bimabharosa.irdai.gov.in. स्टेटस भी वहीं देख सकते हैं।
  4. इंश्योरेंस ओम्बड्समैन एक अलग दफ़्तर, जो कोर्ट के बिना इंश्योरेंस के झगड़े का फ़ैसला करता है। मुफ़्त है और वकील की ज़रूरत नहीं। पते आपके पॉलिसी पेपर में और cioins.co.in पर हैं।

महीनों इंतज़ार न करें। कुछ कदमों की समय सीमा नियमों से तय होती है, और वह बदलती रहती है। मौजूदा IRDAI नियम और अपना पॉलिसी पेपर देख लें।

क्लेम रिजेक्ट क्यों होते हैं

ज़्यादातर इनमें से एक वजह होती है, और इनमें से ज़्यादातर फ़ाइल भेजने से पहले ठीक हो सकती थीं:

भेजने से पहले क्लेम चेक कर लें

अपने बिल, डिस्चार्ज समरी और रसीदें अपलोड करें। हम आसान शब्दों में बताएंगे कि क्या छूट रहा है और किस पर सवाल आ सकता है।

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