क्लेम गाइड
इंश्योरेंस कंपनी की शिकायत कैसे करें
भारत में शिकायत की एक पूरी सीढ़ी है। हर कदम मुफ़्त है और यह हेल्पलाइन पर बार-बार फ़ोन करने से बेहतर काम करता है। एक ही नियम है, क्रम से चढ़ें।
क्रम क्यों ज़रूरी है
हर कदम इसलिए है कि उससे नीचे वाला काम नहीं आया। इसलिए हर कदम पर पिछले कदम का हिसाब पूछा जाता है। अगर कंपनी से शिकायत नंबर लिए बिना सीधे IRDAI जाएंगे, तो वह अक्सर कंपनी को ही वापस भेज दिया जाता है, और दो हफ़्ते चले जाते हैं।
सीढ़ी
- कंपनी का कस्टमर सर्विस उनकी वेबसाइट, हेल्पलाइन या ब्रांच। क्लेम नंबर दें और लिखित में कारण मांगें। कई शिकायतें यहीं ख़त्म हो जाती हैं, जब किसी को लिखकर देना पड़ता है।
- कंपनी की ग्रीवांस टीम यह आम कस्टमर केयर से अलग होती है, और हर कंपनी में होती है। उनके ग्रीवांस पेज से शिकायत करें ताकि शिकायत नंबर मिले। उसे रखें। आगे हर कदम पर वह मांगा जाएगा।
- IRDAI, बीमा भरोसा पर सरकार की ख़ुद की मुफ़्त शिकायत वेबसाइट: bimabharosa.irdai.gov.in. वहीं शिकायत का स्टेटस भी देख सकते हैं, इसलिए यह ईमेल से बेहतर है।
- इंश्योरेंस ओम्बड्समैन एक अलग दफ़्तर जो कोर्ट के बिना इंश्योरेंस के झगड़े का फ़ैसला करता है। मुफ़्त, और वकील की ज़रूरत नहीं। पते आपके पॉलिसी पेपर में और cioins.co.in पर हैं।
क्या तैयार रखें
- आपका पॉलिसी नंबर और क्लेम नंबर
- रिजेक्शन या कटौती का लेटर
- कंपनी से मिला आपका शिकायत नंबर
- तारीखें: भर्ती, डिस्चार्ज, क्लेम भेजने की, और हर जवाब की
- बिल, डिस्चार्ज समरी, और पॉलिसी के वे पेज जिनसे मामला जुड़ा है
- आप क्या चाहते हैं, एक लाइन में: रकम, और क्यों वह मिलनी चाहिए
ऐसे लिखें कि काम हो सके
छोटा और साफ़ सबसे अच्छा चलता है। "मेरे साथ नाइंसाफ़ी हुई" नहीं, बल्कि "लेटर में क्लॉज़ X लिखा है; क्लॉज़ X लागू नहीं होता क्योंकि Y, और यह कागज़ उसे दिखाता है"।
दो चीज़ें हमेशा लिखित में पूछें:
- कौन सा क्लॉज़ लगाया गया। यह जानना आपका हक़ है।
- रकम का हिसाब कैसे बना, अगर पैसे कटे हैं। जो कटौती लाइन बाई लाइन समझाई न जा सके, उस पर सवाल बनता है।
किससे बात कर रहे हैं, ध्यान रखें। सर्च में ऐसे एजेंट आ जाते हैं जो फ़ीस लेते हैं। ऊपर बताए सरकारी रास्ते मुफ़्त हैं। बीमा भरोसा irdai.gov.in पर है, जो सरकारी पता है, और ओम्बड्समैन cioins.co.in पर। पॉलिसी की जानकारी डालने से पहले पता जांच लें, और जो मुफ़्त शिकायत के लिए पैसे मांगे उससे बचें।
इससे बेहतर, ज़रूरत ही न पड़े
यह सब बाद का इलाज है। भारत में ज़्यादातर रिजेक्शन उन कागज़ों से होते हैं जो भेजने से पहले ठीक हो सकते थे: छूटी रसीद, न मिलती तारीखें, बिना दस्तख़त फ़ॉर्म, पॉलिसी सीमा से ऊपर का कमरा।
शिकायत बनने से पहले क्लेम चेक कर लें
अपने बिल, डिस्चार्ज समरी और रसीदें अपलोड करें। जब तक ठीक हो सकता है, हम बता देंगे क्या छूट रहा है।
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